सादिया-ढोला पुल लंबाई में बांद्रा-वर्ली सी-लिंक से भी 30 फीसदी ज्‍यादा, जानिए इसकी खासियतें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन सीमा के पास असम और अरुणाचल प्रदेश को जोड़ने वाले देश के सबसे लंबे पुल का उद्घाटन किया. इसके साथ ही उन्होंने इस पुल को बनाने में हुई देरी को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार पर हमला किया.

ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदी लोहित पर निर्मित इस पुल का नाम गायक दिवंगत भूपेन हजारिका के नाम पर रखा गया है. पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने पुल का नाम धरती के लाल, ब्रह्मपुत्र के बेटे और ब्रह्मपुत्र को पूजने वाले के नाम पर रखने का फैसला किया है. वह दिवंगत भूपेन हजारिका हैं.

यह पुल 60-टन वजनी युद्ध टैंकों का भार वहन कर सकता है. यह देश की पूर्वी सीमा के विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए भारतीय सेना को सुगमता प्रदान करेगा. साथ ही यह चीन की सीमा से करीब 100 किलोमीटर दूर अरुणाचल प्रदेश के एनिनी तक असैन्य तथा सैन्य सामग्री को पहुंचाने में मददगार होगा.

असम के तिनसुकिया जिले के सादिया और ढोला के बीच बना 9.15 किलोमीटर लंबा पुल न केवल असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच 165 किलोमीटर की दूरी कम कर देगा, बल्कि इससे दोनों राज्यों के बीच यात्रा के पांच घंटे भी बचाए जा सकेंगे. अन्य मार्ग से ढोला से सदिया जाने में आठ घंटे, ब्रह्मपुत्र नदी में नौका के सहारे साढ़े चार घंटे, जबकि अब वही रास्ता मात्र आधा घंटे में तय होगा.

पीएम मोदी ने कहा कि यह पुल न केवल पैसे बचाएगा, बल्कि यात्रा अवधि को भी कम करेगा और यह नई आर्थिक क्रांति के शुरुआत की नींव है. यही कारण है कि पूरे देश की नजरें इस पुल पर हैं. भारत को दक्षिण एशिया से जोड़ने में यह क्षेत्र अपनी अहम भूमिका निभाएगा और यह पुल असम तथा अरुणाचल के लोगों को करीब लाएगा.

इस पुल की खासियत
- ढोला-सादिया पुल की लंबाई 9.15 किमी है, जो देश का सबसे लंबा पुल है.
- ये पुल 182 खंभों पर टिका है.
- इसे बनाने का काम 2011 में शुरू हुआ और इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 950 करोड़ की है.
- ढोला-सादिया पुल लंबाई के लिहाज से बांद्रा-वर्ली सी-लिंक से भी 30 प्रतिशत लंबा है.
- यह पुल नॉर्थ ईस्ट के दो राज्यों असम और अरुणाचल प्रदेश को जोड़ेगा.
- यह असम की राजधानी दिसपुर से 540 किमी और अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर से 300 किमी दूर है.
- इस पुल से चीन की सीमा का एरियल डिस्टेंस या हवाई दूरी 100 किमी से भी कम की है.
- तेजपुर के करीब कलाईभोमोरा पुल के बाद ब्रह्मपुत्र पर अगले 375 किमी याली ढोला तक बीच में कोई दूसरा पुल नहीं है.
- इस पुल के बनने के बाद करोबार बढ़ेगा, अभी तक इस इलाके में नदी के आरपार सारे कारोबार नावों के जरिए ही होते रहे हैं.
- इससे चीन सीमा तक के सफर में 4 घंटे की कटौती होगी.
- पुल इतना मजबूत बनाया गया है कि 60 टन के मेन बैटल टैंक भी गुजर सकें.
- इतना ही नहीं ये भूकंप के झटके भी आसानी से झेल सकता है.

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